टाइम कैप्सूल क्या होता है और इसका इस्तेमाल – 2021 Update

टाइम कैप्सूल की चर्चा तो आप ने भी सुनी ही होगी अगर नहीं तो आज के इस पोस्ट में आपको जानकारी मिलने वाली है, टाइम कैप्सूल के बारे में साथ ही साथ आप यह भी जान पाएंगे की हमारे देश पहली बार टाइम कैप्सूल इस्तेमाल कब और किसने किया था। पूरी जानकारी को प्राप्त करने के लिए पोस्ट को आखिर तक जरूर पढ़ें।

आज आप यह भी जानेंगे की टाइम कैप्सूल हमारे लिए वरदान के समान क्यों है ?

हम मनुष्य अपने दिमाग के इस्तेमाल से कई सारे ऐसे कारनामे करते है जिसको देखकर पूरी दुनिया हैरान हो जाती है। वो हवाई जहाज हो मोबाइल फ़ोन हो या कंप्यूटर हमलोगो ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत को दिखाया है। उसी कड़ी में आज हमलोग बात करने वाले है टाइम कैप्सूल के बारे में।

टाइम कैप्सूल क्या होता है और इसे हिस्ट्री टेलर क्यों कहते हैं ?

टाइम कैप्सूल एक प्रकार का protective container है जिस में रखे हुए कागज, दस्तावेज, आर्ट्स काफी लम्बी अवधी तक सुरक्षित रह सकते हैं यानि की आपने 2020 के इस वर्तमान जानकारियों को संयोजित करके एक ऐसे box में रखते है जो की वर्ष 3091 में अगर किसी के द्वारा खोला जाता है तो उसमे मौजूद सारी चीज़े सुरक्षित रहेंगी साथ ही साथ containerbox के material पे भी कोई नुक्सान नहीं होगा।

हमारे present की जानकारियों को भविष्य के लोगों तक पहुचाने वाले इस protectivecontainer को टाइम कैप्सूल कहते हैं। time कैप्सूल के इस अनोखे प्रयोग से हम अपने आज की जानकारी को कल के लोगों यानि भविष्य के लोगो को हम अपनी कहानी काफी आसानी से बता सकते हैं। इस अनूठी प्रक्रिया के वजह से ही time capsule को story taylor के नाम से जाना जाता है।

time capsule कैसा होता है ?

time capsule का कोई ज़रूरी आकार नहीं होता। इसका आकार इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है की उसे किस आकर का और कितना बड़ा होगा। Generally , time capsule का आकार cylindrical या spherical shape में होता है। जिसकी लम्बाई लगभग 3 -35 feet के आस पास होती है।

इसका material काफी स्ट्रांग होता है जो की पानी, उच्च दबाव को काफी आसानी से सहन करके कई सौ सालो तक अपने अंदर मौजूद तथ्य को संभाले रखता है।

टाइम कैप्सूल

time capsule किसने बनाया था?

Wikipedia के अनुसार टाइमकैप्सूल को पहली बार कब बनाया गया था ये बता पाना काफी मुश्किल है। मगर अब तक का सबसे पुराने टाइम कैप्सूल की खोज 17 शताब्दी में में हुई थी।

वैसे box जो किसी सभ्यता, या किसी काल की जानकारी को समेटे हुए खुद के अंदर रखते हैं उस प्रकार के बक्से का नामकरन 19 वी शताब्दी में किया गया था।

INDIA में टाइम कैप्सूल का इस्तेमाल

INDIA में टाइम कैप्सूल का इस्तेमाल होने की चर्चा कई बार दुनिया में फैली मगर इस बात का कोई खास प्रमाड किसी के पास भी नहीं है।

सूत्रों की माने तो एक वक़्त में इंदिरा गाँधी ने लाल किले के जमीन के निचे टाइम कैप्सूल को दफ़न करवाया था। मगर ऐसा कहा जाता है की इंदिरा गाँधी की सरकार के जाने के बाद नयी सत्ता धारी पार्टियों ने उस टाइम कैप्सूल को बाहरनिकलवा दिया।

इसके बाद चर्चा में आया हमारी प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का नाम जिन्होंने वर्ष 2010 भारत के अति प्रसिद्ध कॉलेज IIT कानपूर के जमीन में डाला गया। जिसमे IIT कानपूर college से जुड़े कई सरे महत्वपूर्ण जानकारिया थी।

हाल ही में यह भी बात सामने निकलके आयी की हमरे देश में जो राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है उसमे भी टाइम कैप्सूल को भूमि में 2000 फ़ीट अंदर दफनाया गया है। मगर राम मंदिर के कार्यपालक के अनुशार ये बात सिर्फ और सिर्फ एक अफवाह है।

सारांश

टाइम कैप्सूल को आप एक बक्से के रूप में समझे जिस में वर्त्तमान समय की महत्वपूर्ण जानकारियों को रख कर के दामिन में दफ़न कर दिया जाता है। जिसे आने वाली पीढ़ियां उसे बक्से को बाहर निकाल करके अपने पूर्वजो की मौजूदा स्थिति की जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं।

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